वैदिक दुनिया Vedic World Important gks and basic knowledge of Vedas for CGPSC RAILWAY VYAPAM SSC Govt. Jobs CG Teacher job .

वैदिक दुनिया(Vedic World) वेद शब्द संस्कृत के 'विद' शब्द से लिया गया है जिसका अर्थ होता है जानना या ज्ञान। 1500 ई.पू. से लेकर 600 ई. पू. तक के काल को वैदिक साहित्य का काल या वैदिक काल कहा जाता है। वैदिक काल को दो कालखण्डों में विभाजित किया गया है। (1500-1000) ई.पू. के कालखण्ड को ऋग्वैदिक या पूर्व वैदिक काल कहा जाता है तथा (1000-600) ई.पू. के कालखण्ड को उत्तर वैदिक काल कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि आर्यन लोग मध्य एशिया से भारत आये थे। ये लोग कुछ सालों तक सप्तसिंधु नामक प्रदेश पर रहे फिर उसके पश्चात गंगा और यमुना नदी घाटी के मैदानों पर आकर बस गये। बोगाजकोई अभिलेख जो कि एशिया माइनर तुर्की से प्राप्त हुआ है उसमें 4 वैदिक देवताओं का उल्लेख मिलता है जो कि इस प्रकार है- इन्द्र, वरुण, मित्र, वस्तय जो कि मध्य एशिया को इनका घर साबित करने में पुख्ता सबूत नजर आता है। ऐसा माना जाता है कि ऋग्वेद की रचना तब हुई थी जब आर्यन लोग भारत के पंजाब में रहा करते थे। वेदों की संख्या चार है- ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद। ऋग्वेद इनमें से सबसे पुराना वेद है। वेदों में ज्ञान, विज्ञान, ढेर सारी जानकारियां एवं रहस्यमयी ज्ञान छुपा हुआ है। कई सारे आधुनिक थेओरिस का सम्बन्ध भी वेदों से है। आज वेदों के ऊपर विदेशों में शोध चल रहा है और वे इनमें छुपे रहस्यों को ढूंढने में लगे हुए हैं। ज्ञान के खजाने का यह भण्डार हमें हमारे पूर्वजों द्वारा उपहार स्वरूप मिला हुआ है जिसे हम चाहें तो बड़ी आसानी से समझ सकते हैं पर अफसोस कहते हैं ना कि जिसके पास हीरा होती है वो हिरे की कदर नहीं करता वही वाली बात अक्सर सामने निकल कर आती है पर कोई बात नहीं मैं हूँ ना आपका दोस्त जो आपको वेदों के बारे में थोड़ा बहुत जानने में मदद करेगा। तो चलिये बिना किसी भी देरी के आगे बढ़ते हैं। पहले जब वेदों को लिखा नहीं गया था तो उसे एक पीढ़ी से दूसरे पीढ़ी तक मौखिक रूप में ही हस्तांतिरत किया जाता रहा फिर जब उन्हें मौखिक रुप से हस्तांरण करने में बाधा आई या यों कहें कि आगे की पीढ़ी को समझने में परेशानी आई तो इसे लिखित दस्तावेज के रूप में सुरक्षित करने का सोचा गया। वेदों को श्रुति भी कहा जाता है क्योंकि तब के जमाने में सीधा सुनकर मस्तिष्क पटल पर याद कर लिया जाता था। वेदों को ठीक से समझने के लिये चार चीजों का अध्ययन करना जरूरी है जो कि इस प्रकार हैं- 1.वेद/संहिता, 2.ब्राम्हण ग्रंथ, 3.अरण्यक, 4.उपनिषद/वेदांग। चलिये अब चारों वेदों के बारे में भी जान लेते हैं कि आखिर ये हैं क्या? (1)ऋग्वेद:- यह चारों वेदों में सबसे पुराना वेद है। यह हिन्द यूरोपीय भाषा परिवार का सबसे प्राचीन रचना है। इसमें 10 मण्डल है और बालखिल्य सहित 1028 सूक्त हैं। इसमें 10627 मंत्र हैं परन्तु मंत्रों की संख्या के विषय में विद्वानों में अभी भी मतभेद जारी है। देवताओं के यज्ञ में आह्वान के लिए मंत्र हैं। यह एक प्रमुख हिन्दू ग्रंथ है। ऋग्वेद के विषय में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियाँ:- *1.ऋग्वेद में ही महामृत्युंजय मंत्र वर्णित है। *2.विश्व विख्यात गायत्री मंत्र का भी उल्लेख इसमें किया गया है। *3.ऋग्वेद में 33 प्रकार के देवी देवताओं का उल्लेख किया गया है। *4."असतो मा सदगमय" वाक्य ऋग्वेद से लिया गया है। *5.ईरानी अवेस्ता की गाथाओं का ऋग्वेद के श्लोकों के जैसे स्वरों में होना रहस्मयी प्रतीत होता है जिसमें हिन्दू देवताओं जैसे कि अग्नि, वायु, जल, सोम आदि का वर्णन किया गया है। *6.ऋग्वेद को इतिहास की दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण रचना माना गया है और यही विश्व का पहला ग्रंथ है। (2)सामवेद:- यह एक गीत संगीत प्रधान वेद है। साम का अर्थ ही होता है गान। यह चारों वेदों में सबसे छोटा है। यद्यपि यह चारों वेदों में सबसे से छोटा है कदापि इसकी महत्ता इन चारों वेदों में से कम नहीं है। इसकी प्रतिष्ठा सर्वाधिक है जिसका प्रमाण गीता में श्रीकृष्ण जी द्वारा"वेदानां सामवेदोस्मि" कहना भी है। इसमें कुल 1875 मंत्र हैं जिनमें से 69 को छोड़कर सभी मंत्र ऋग्वेद से लिया गया है तथा 17 मंत्रो का उल्लेख यजुर्वेद और अथर्ववेद में मिल जाता है। यह चारों वेदों का सार है। सामवेद के दो भाग है:- आर्चिक और गान। पुराणों से हमें इसके 1000 शाखाओं के होनी की जानकारी मिलती है। सामवेद के अध्ध्यन करने वाले पंडित को पंचविश या उग्दाता कहते हैं। सामवेद में ऐसे मंत्र मिलते हैं जिनसे इस बात की पुष्टि होती है कि हमारे पुर्वज वैदिक ऋषियों को ऐसे-ऐसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तथ्यों की जानकारी थी जो आधुनिक वैज्ञानिकों को हजारों साल बाद प्राप्त हो सकी। जैसे कि पृथ्वी का घूमना और चंद्रमा का सूर्य की प्रकाश से प्रकाशित होना आदि। (3)अथर्ववेद:- यह एक प्रमुख हिन्दू धर्म ग्रंथ हैं। इसमें गद्य और पद्य दोनों में मंत्र वर्णित हैं जो कि यज्ञ के लिए हैं।

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