चाणक्य का जन्म 376 ई. पू. में तथा मृत्यु 283 ई. पू. में हुआ था। इनका दूसरा नाम कौटिल्य तथा विष्णुगुप्त था। चाणक्य तक्षशिला विश्वविद्यालय के आचार्य तथा चंद्रगुप्त मौर्य के महामंत्री थे। एक बार नंद वंश के शासक घनानंद ने अपने दरबार में इनकी बेइज्जती इनके रंग को लेकर की थी तभी इन्होंने गुस्से में आकर अपनी शिखा खोल दी तथा कमम खाई कि जब तक नंद वंश का नाश न कर दूँ तब तक अपनी शिखा या चोटी नहीं बाधुँगा। नंद वंश का विनाश कर इन्होंने 322 ई.पू. में चन्द्रगुप्त मौर्य को राजा बनाया जो कि मौर्य वंश के संस्थापक तथा महान अशोक सम्राट के दादाजी थे। चाणक्य बहुत ही बुद्धिमान थे तथा सभी विषयों के ज्ञाता थे। कौटिल्य पंडित की सबसे महत्वपूर्ण रचना अर्थशास्त्र है जिसकी चर्चा सर्वत्र मिलती है। चाणक्य के शिष्य कामंदक ने अपने ग्रंथ नीतिसार में लिखा है कि विष्णुगुप्त चाणक्य ने अपने बुद्धि बल से अर्थशास्त्र रूपी महोदधि को मथकर नीतिशास्त्र रूपी अमृत लिखा। चाणक्य जी का ग्रंथ विष्णुगुप्त सिद्धांत ज्योतिष पर आधारित है तथा आयुर्वेद पर इन्होंने वैद्यजीवन नामक ग्रंथ लिखा।
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